12 August : RBH NEWS : Gaurav
काज़ीपेट दरगाह में ‘अहले बैत कॉन्फ्रेंस’ में पहुंचे डॉ. सूफी राज जैन, तेलंगाना के मंत्रियों से हुई मुलाकात

‘अहले बैत का पैगाम—इंसानियत के नाम’ विषय पर गंगा-जमुनी तहज़ीब, मोहब्बत और सर्वधर्म समभाव का संदेश
हज़रत सैयद शाह अफ़ज़ल बियाबानी (रह.) की पवित्र दरगाह, काज़ीपेट में आयोजित ‘अहले बैत कॉन्फ्रेंस’ में डॉ. सूफी राज जैन के पधारने पर उनका प्रेम, सम्मान और गर्मजोशी के साथ भव्य स्वागत किया गया।

डॉ. सूफी राज जैन ने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए काज़ीपेट दरगाह के सज्जादानशीन एवं तेलंगाना स्टेट हज कमेटी के चेयरमैन जनाब सैयद गुलाम अफ़ज़ल बियाबानी खुसरो पाशा को विशेष रूप से मुबारकबाद दी। उन्होंने कहा कि आज के दौर में यह बेहद जरूरी है कि सूफी दरगाहें अहले बैत की मोहब्बत, इंसानियत, भाईचारे और शांति के पैगाम पर खुलकर संवाद करें और समाज को सही दिशा दिखाएं। काज़ीपेट दरगाह द्वारा इस विषय पर पहल करना एक सराहनीय और प्रेरणादायक कदम है।
सम्मेलन का मुख्य संदेश “अहले बैत का पैगाम—इंसानियत के नाम” रहा। कार्यक्रम में मोहब्बत, इंसानियत, भाईचारे, शांति और सर्वधर्म समभाव की भावना को मजबूत करने पर विचार-विमर्श हुआ।
गंगा-जमुनी तहज़ीब भारत की असल पहचान
सम्मेलन में भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब को देश की असल पहचान बताते हुए कहा गया कि भारत की खूबसूरती उसकी विविधता और सदियों से चली आ रही साझा संस्कृति में है। सभी धर्मों और समुदायों के लोगों को मिल-जुलकर रहना चाहिए तथा एक-दूसरे की आस्था, परंपराओं और भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
डॉ. सूफी राज जैन ने कहा कि अहले बैत ने दुनिया को मोहब्बत, इंसानियत, सब्र, त्याग और इंसाफ का जो पैगाम दिया, उसे केवल सुनना नहीं बल्कि अपनी ज़िंदगी में उतारना ही सच्ची श्रद्धा है।
उन्होंने कहा कि भारत की असल ताकत उसकी गंगा-जमुनी तहज़ीब में है। अलग-अलग धर्म, पंथ और परंपराएं हमारी कमजोरी नहीं बल्कि हमारी खूबसूरती हैं। हमें इन विविधताओं को दूरी का कारण नहीं, बल्कि एक-दूसरे से जुड़ने का माध्यम बनाना चाहिए।
तेलंगाना सरकार के मंत्रियों से मुलाकात

इस अवसर पर डॉ. सूफी राज जैन ने तेलंगाना सरकार के राजस्व, आवास एवं सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी से मुलाकात की। दोनों के बीच जनकल्याण, सामाजिक सौहार्द, समावेशी विकास, सामाजिक एकता और समाज में आपसी सम्मान को बढ़ावा देने सहित विभिन्न विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ।
मुलाकात के दौरान तेलंगाना के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद अजहरुद्दीन, वन, पर्यावरण एवं बंदोबस्ती मंत्री श्रीमती कोंडा सुरेखा तथा तेलंगाना स्टेट हज कमेटी के चेयरमैन एवं काज़ीपेट दरगाह के सज्जादानशीन जनाब सैयद गुलाम अफ़ज़ल बियाबानी खुसरो पाशा भी मौजूद रहे।

अहले बैत की मोहब्बत को जीवन में उतारने का आह्वान
डॉ. सूफी राज जैन ने कहा कि अहले बैत का पैगाम किसी एक मज़हब या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी इंसानियत के लिए मोहब्बत, करुणा, त्याग, सेवा और भाईचारे का पैगाम है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अगर हम अहले बैत की शिक्षाओं को अपनी ज़िंदगी में उतारें और एक-दूसरे के लिए मोहब्बत, सम्मान तथा सेवा की भावना रखें, तो समाज में नफरत की जगह मोहब्बत और दूरी की जगह भाईचारा कायम हो सकता है।
उन्होंने कहा कि “सर्वधर्म समभाव” केवल एक विचार या नारा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा है। सूफी दरगाहें सदियों से प्रेम, शांति और इंसानियत का संदेश देती रही हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से इस विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।


