24 June 2026 | RBH News | Gaurav |
छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड द्वारा प्रदेश की दरगाहों, उर्स , मुहर्रम और अन्य धार्मिक आयोजनों में DJ, नाच-गाना सहित विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों पर लगाए गए प्रतिबंध को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अंतरिम रूप से स्थगित कर दिया है। हाईकोर्ट के इस महत्वपूर्ण फैसले को सूफी समुदाय और धार्मिक आयोजकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

गौरतलब है कि वक्फ बोर्ड ने 11 जून 2026 को जारी आदेश में दरगाहों और उर्स , मुहर्रम समारोहों में DJ, धूमाल और अन्य पारंपरिक कार्यक्रमों पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। साथ ही आदेश का उल्लंघन करने वालों पर 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान भी रखा गया था।
इस आदेश को चुनौती देते हुए सूफी इस्लामिक बोर्ड ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के दौरान माननीय हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद वक्फ बोर्ड के आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी।

इस महत्वपूर्ण कानूनी सफलता के पीछे मंसूर खान, राष्ट्रीय अध्यक्ष, सूफी इस्लामिक बोर्ड,
डॉ. सूफी राज जैन, संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, सर्व धर्म ख्वाजा मंदिर, तथा उत्तर भारत सूफी इस्लामिक बोर्ड के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की सक्रिय भूमिका और निरंतर प्रयासों को विशेष रूप से सराहा जा रहा है। सूफी इस्लामिक बोर्ड, ने भी इस विषय को मजबूती से उठाते हुए समुदाय की भावनाओं और परंपराओं की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
डॉ. सूफी राज जैन ने कहा कि दरगाहों और उर्स की परंपराएं सदियों से प्रेम, भाईचारे, सूफी संगीत और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक रही हैं। ऐसे आयोजनों पर एकतरफा प्रतिबंध लगाना धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्वतंत्रता के अधिकारों को प्रभावित करता है। उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय और संविधान की भावना के अनुरूप बताया।
सूफी इस्लामिक बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंसूर खान ने कहा कि यह निर्णय देशभर के सूफी अनुयायियों और दरगाहों से जुड़े लाखों लोगों के लिए राहत लेकर आया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी सुनवाई में भी न्यायालय सभी पक्षों का विस्तृत परीक्षण कर न्यायसंगत निर्णय देगा।
फिलहाल हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के बाद वक्फ बोर्ड द्वारा जारी प्रतिबंधात्मक निर्देश प्रभावी नहीं रहेंगे। मामले की अगली सुनवाई में वक्फ बोर्ड के अधिकार क्षेत्र, धार्मिक आयोजनों में लगाए गए प्रतिबंधों की वैधता तथा याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए संवैधानिक मुद्दों पर विस्तृत विचार किया जाएगा।


