Monday, May 25, 2026

केरल में ‘आत्मबोधोदय संगम’: भक्ति-सूफी समागम से गूंजा एकता का संदेश, वैश्विक शांति पर जोर

केरल के अलाप्पुझा में आयोजित आत्मबोधोदय संगम में भक्ति और सूफी परंपराओं का संगम देखने को मिला, जहां देशभर के संतों और विद्वानों ने अद्वैत वेदांत और सूफी दर्शन के जरिए वैश्विक शांति, एकता और मानवता के संदेश को मजबूती से रखा।

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29 April 2026|RBH News|Gaurav| केरल में भक्ति-सूफी समागम: आत्मबोधोदय संगम में आध्यात्मिक एकता का संदेश, वैश्विक शांति पर जोर


केरल के अलाप्पुझा जिले में स्थित श्री शुभानंद आश्रमम, चेनुकोले में आयोजित आत्मबोधोदय संगम के दौरान भक्ति और सूफी आंदोलन के पुनरुत्थान की झलक देखने को मिली। यह आयोजन श्री शुभानंद गुरुदेव के 144वें जन्मदिवस के अवसर पर संपन्न हुआ, जिसमें देशभर की प्रमुख आध्यात्मिक और सूफी हस्तियों ने भाग लिया।


इस समारोह में सूफी इस्लामिक बोर्ड की टीम अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष मंसूर खान और महासचिव दर्शन अहीर के नेतृत्व में शामिल हुई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वाराणसी स्थित श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी आनंदवनम भारती महाराज रहे।


कार्यक्रम का संचालन ब्रह्मश्री देवेंद्र गुरुदेव थिरुवादिकल ने किया, जहां विभिन्न आध्यात्मिक गुरुओं और विद्वानों ने अद्वैत वेदांत और सूफी दर्शन पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने बताया कि आत्म-साक्षात्कार न केवल व्यक्ति को आंतरिक शांति देता है, बल्कि समाज को मानसिक विकारों से मुक्त करने की दिशा में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

इस दौरान स्वामी दयानंद सरस्वती, श्री रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महान विचारकों के उदाहरण प्रस्तुत किए गए। सैयद अब्दुल्ला कोया जिफ्री तंगल ने सूफी विचारधारा के ‘वहादत-उल-वजूद’ को अद्वैत वेदांत के ‘अहम ब्रह्मास्मि’ सिद्धांत के समान बताया।

अपने संबोधन में स्वामी आनंदवनम भारती महाराज और मंसूर खान ने ‘सामूहिक चेतना’ की शक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक संघर्षों के दौर में यह विचार मानवता को एक नई दिशा दे सकता है और आपदाओं के मार्ग को बदलने में सक्षम है।

कार्यक्रम के बाद मंसूर खान ने कहा कि इस मंच को साझा करना उनके लिए गर्व का विषय है और वे सभी धर्मों के आध्यात्मिक प्रतिनिधियों को एकजुट कर वैश्विक शांति की दिशा में कार्य करते रहेंगे।

डॉ. सूफी राज जैन ने इस आयोजन को भारत की गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक बताते हुए कहा, “ऐसे आध्यात्मिक संगम ही विश्व को शांति, सद्भाव और एकता का मार्ग दिखा सकते हैं। सूफी और वेदांत का समन्वय मानवता के उत्थान की सबसे बड़ी शक्ति है।”

SourceRbh news
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