Wednesday, April 22, 2026

ऐवान-ए-ग़ालिब में गूँजी इंसानियत की आवाज़: डॉ. सूफ़ी राज जैन और कनीज़-ए-सकीना ने ‘जन्नतुल बक़ी’ के पुनर्निर्माण पर साझा किया विज़न

नई दिल्ली के ऐवान-ए-ग़ालिब में भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम, Dr. Sufi Raj Jain और Kaneez-e-Sakina (Divya Guru Maa) ने जन्नतुल बक़ी के पुनर्निर्माण पर रखा विज़न; इंसानियत, एकता और सूफ़ी विचारधारा का दिया संदेश

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20 April 2026 | RBH News | Gaurav Jaswal | राजधानी के प्रसिद्ध ऐवान-ए-ग़ालिब ऑडिटोरियम में एक भव्य आध्यात्मिक और वैचारिक कार्यक्रम संपन्न हुआ। सूफ़ी इस्लामिक बोर्ड और अलबकी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इंसानियत, भाईचारे और पवित्र स्थलों के सम्मान को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम में डॉ. सूफ़ी राज जैन और कनीज़-ए-सकीना (दिव्या गुरु माँ) विशेष रूप से संबोधन किया। दोनों विभूतियों ने मदीना स्थित ऐतिहासिक कब्रिस्तान जन्नतुल बक़ी के पुनर्निर्माण को लेकर अपना स्पष्ट विज़न और विचार साझा किए। डॉ. सूफ़ी राज जैन ने इस दिशा में एक ठोस रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए लोगों को इस मुहिम से जुड़ने का आह्वान किया।

*आध्यात्मिक ऊर्जा और नई उम्मीद**
कनीज़-ए-सकीना के संबोधन ने ऑडिटोरियम में मौजूद जनसमूह के भीतर एक नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया। उनके शब्दों ने न केवल लोगों को आध्यात्मिक सुकून दिया, बल्कि समाज में एकता और शांति की नई उम्मीद भी जगाई। कार्यक्रम के समापन पर बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कनीज़-ए-सकीना से व्यक्तिगत मुलाकात की। लोगों ने भावुक होकर उनसे ‘शहज़ादी के दरबार’ में अपने और अपने परिवार के लिए विशेष दुआ करने का अनुरोध किया।

इस गरिमामयी अवसर पर राजनीति, धर्म और समाज सेवा से जुड़ी कई बड़ी हस्तियाँ एक मंच पर नज़र आईं। कार्यक्रम में मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी, और मोहम्मद हनीफा जान जैसे दिग्गजों ने शिरकत कर इस मुहिम को अपना समर्थन दिया। सूफ़ी इस्लामिक बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंसूर खान और दर्शन अहीर ने भी सभा को संबोधित करते हुए सूफ़ी विचारधारा के माध्यम से समाज को जोड़ने पर ज़ोर दिया।। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह से आध्यात्मिक और भावनात्मक रहा, जहाँ सूफ़ी विचारधारा के माध्यम से ‘इंसानियत’ के संदेश ने सभी मतभेदों को मिटाकर लोगों को एकजुट करने का काम किया। डॉ. सूफ़ी राज जैन ने कहा यह आयोजन केवल एक चर्चा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहरों को सहेजने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

SourceRbh news
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